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On this occasion of Republic Day, would like to express sincere gratitude to all those who have contributed towards the development of our Country!
#happyrepublicday2021

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#क्षत्राणी_हंसा_कंवर

सरपंच #दूजोद,

सीकर

क्षत्रिय कितने भी बडे़ पद पर चले जाए पर अपने संस्कार नहीं भुलते
इसको कहते हैं संस्कार 👌🙏

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जीणमाता Darshan

सीकर सूं दिक्खण-पूरब में 7 मील री दूरी माथै हर्ष रौ पहाड़ आयौ थकी है। इण पहाड़ रै नीचै हर्ष नाम रौ अेक छोटौ-सोक गाम ई बस्यौड़ौ है। हर्ष रौ पहाड़ अर जीणमाता रा पहाड़ अके ई श्रेणी में है।
अेक कैवत जीवा ही- 'जिण न देखी जीण, जग में आय'र के कीण' कैवण रौ मतलब औ के जे जीण माता रा दरसण नीं कर्या तौ दुनिया में आय'र पछै कांई कर्यौ!

जीण जिकी के जीणमाता रै नाम सू चावी है, लारलै केी सईकां सूं लोक में पुजीजती चाली आय रैयी है। इणरौ मिंदर सीकर सूं 7 कोस दिक्खण में है। मिंदर पहाड़ां री घाटी में आयौ थकौ है। जिण पहाड़ां री घाटी में मिंदर है, वै जीण्‌ाता रै पहाड़ां रै नाम सूं चावा है।

आयै बरस चैत अर आसोज रै नौरतां में जीणमाता रै मिंदर में बड़ौ मेलौ लागै अर दूर-दूर सूं लाखूं लोग जीणमाता र दरसण करण नै आवै। जीणमाता इणी लोक री मानवी ही, जिकी आपरै त्याग-तपस्या भर्यै जीवण रै कारण लोक में पूजीजी।

विक्रम रे इग्यारवैं सईकै री सरूआत में चौहाण घंघ (घंघरान) चूरू नगर सूं 4 कोस पैली आपरै नाम सूं 'घांघू' गाम बसायौ हौ। घंघ दो ब्याव कर्या हा अर दोनूं ई राणियां सूं उणरै तीन तीन संतानां पेदा हुई। पैली राणी सूं दो पेटा हर्ष अर हरकरण ने अेक बेटी जीण, अर दूजी राणी रै तीन बेटा कन्ह, चंद ्‌र इंद पैदा हुया। क्यूंकै दूजी राणी ब्याव सूं पैली आपरै गरभ सूं पेदा हुवण वालै बेटै नै उत्तराधिकारी बणावण रौ वचन लेय चुकी ही, सो घंघ री मौत रै बाद कन्ह बाप री गादी माथै बैठ्यौ, जदकै सबसूं बडौ बेटौ हुवण रै नातै असली हकदार हर्ष हौ।

यूं तौ घंघ रै छह संतानां ही, पण लोक हर्ष अर जीम आं दोनां नै इज याद राख्या। आ दोनूं जिकी त्याग-तपस्या करी, वा फगत राजस्थान रै ई नीं, आखै भारत रै इतिहास में न्यारी निकेवली अर बेजोड़ है। जीम नारी समाज रै दियोड़ै झूठै लांछनां सूं समाज नै सदीव सारू छोड दियौ अर उणरौ साथ दियौ उणरौ मांजायौ भाई। बैन-भाई रै पवित्र रिस्तै नै अै दोनूं जकी ऊंचायां तांई पुगाय दिया, वै आखी दुनिया में दरलभ है।

हर्ष अर जीण सूं संबंध राखण वालौ अेक बौत ई बडौ अर हीयपरसी लोकगीत प्रचलित है जिकौ बौत पुराणौ ई है। गीत में हर्ष और जीण री बातचीत रै जरियै उणां रै जीवण री सगली घटनावां वरणित है। गीत इत्तौ मारमिक है के पढण अर सुणण वालां री आंख्यां में आंसू भर आवै। भाई-बैन रा मरमपरसी संवाद अंतस में उतर'र हर कोई नै झंझोड़ न्हाकै।

लोकगीत सूं पत्तौ पड़ै के आं दोनां रौ जनम घांघू मेंय हुयौ हौ। हर्ष रौ ब्याव हुय चुक्यौ हौ अर जीम कंवारी ही। मर्यां सूं पैली आं दोनां रा मां-बाप जीण री भोलावण देवतां हर्ष सूं वचन लियौ के वौ उणने किणी ई भांत रौ राई-रत्ती ई सस्ट नीं हुवण देवैला। अेक दिन हर्ष री बहू जीण नै तानौ मार दियौ। जीण उणी बगत घर छोड'र निकलगी। लारै जद हर्ष घरै आयौ अर उणनै आ बात ठा पड़ी तौ वौ अजेज जीण नै मनावण सारू न्हाट्यौ। दोनूं ई मांजायै भाई-बैन नै

बालपणै सूं लेय'र बडै हुवण तांई रा साथै बिताया दिन याद आवम लाग्या। वां सनेवभर्यौ दिनां नै याद करती थकी जीण फूट-फूट'र रोय पड़ी। हर्ष उणनै पाछी घरै चालण री लाख कोसिस करी, पण वा आपरै माथै लगायै गयै झूठै लांछन री वजै सूं टस सूं मस नीं हुई अर हर में लौ लगावण री पूरी तेवड़ली। उणरी बातां सुण'र हर्ष रै मन में ई वैराग जागग्यौ अर वौ ई उणी वगत उणरै साथै तपस्या करण सारू रवानै हुयग्यौ, आ कैवतौ थकौ के जीवतौ तौ वौ कदैई उणसूं नीं बिछड़ैला, अेक मौत ई वां दोनां नै बिछड़ाय सकै।

दोनूं ई सीकर सूं कीं दूर आयै थकै पहाड़ माथै पूग्या अर आमनै-सामनै री दो चोटियां माथै न्यारा-न्यारा, भाई-बैन हुवण रै नातै अेक दूसरै नै पीठ देवता तपस्या करण लागग्या।

जुग बीतग्या आ घटना घटियां नै, पण दोनूं ई भाई-बैन री कहाणी आज ई लोगां री जबान मातै है। दोनां रै ई त्याग-तपस्या री साख भरता 'जीणमाता मिंदर' अर 'हर्षनाथ मिंदर' आज अरावली परबत री श्रृंखला रै नीचलै हिस्सै में ऊभा है।

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बिचौलियों को खत्म करना है तो दवा के कारोबार से कीजिए। अभी किसी चैनल पर सीरम इंस्टीट्यूट के अदार पूनावाला को सुना। बता रहे थे कि सरकार को वैक्सीन की एक डोज 200 रुपये में देंगे, जो कि दवा दुकानों से 1000 रुपए में मिलेगी। 1000 रुपये में इसलिए मिलेगी, क्योंकि इसमें डिस्ट्रीब्यूटर और रिटेलर का भी कमीशन है। सीरम इंस्टीट्यूट को तो केवल 400-500 ही मिलेंगे।

यानी यदि यह भी मान लिया जाए कि सरकार को यह वैक्सीन लागत मूल्य पर ही दी जा रही है तो भी जिस वैक्सीन की लागत मूल्य केवल 200 रुपये है, उसे 1000 रुपये में बेचने की इजाज़त हमारी व्यवस्था किस लॉजिक के हिसाब से देगी? लागत से 5 गुना ज्यादा कीमत लूट नहीं है क्या?

यह लूट सभी दवाओं में हो रही है। सभी दवाएं अपनी लागत से 5-10 गुना ज़्यादा कीमत पर ही बेची जा रही हैं। जेनरिक दवाओं के दाम देखिए, लेकिन उन्हीं दवाओं को अलग अलग कंपनियां अलग अलग नाम से बनाकर 5-10 गुना अधिक कीमत पर बेच रही हैं। लेकिन इन दवा कंपनियों की लूट को रोकने के लिए कोई सरकार कानून नहीं बनाती।

और तो और, बाज़ार आज नकली दवाओं से भरे हुए हैं। एक बार तो एक दुकान से खरीदा गया क्रोसिन खाकर भी मेरा बुखार नहीं उतरा था, तो फिर दूसरे दुकान से खरीदा हुआ क्रोसिन खाकर अपना बुखार उतारा। कोई गंभीर मरीज हो तो नकली दवा के ये कारोबारी उसकी जान ही ले लेते होंगे और ये हत्याएं किसी रिकॉर्ड बुक में भी दर्ज नहीं होतीं।

स्वास्थ्य और जीवन जैसे क्षेत्र में हो रहे इस खिलवाड़ की तरफ किसी का ध्यान नहीं है, क्योंकि यह लूट करने वाले बड़े कॉरपोरेट घराने और बड़ी कंपनियां हैं। ये अलग बात है कि देश आजकल आलू, प्याज, गेहूं, धान के बिचौलियों को देखकर ठिकाने लगाने में व्यस्त है, जो बेचारे महज 2-4 या 5-10 रुपये किलो बीच में खा लेते होंगे।

जय हिंद।

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