कल
एक तन्दूर पर रोटी लेने गया, मैंने पैसे दे दिए और
रोटी लगाने वाले को रोटी लगाने को कहा।

इसी बीच
एक और व्यक्ति भी आ गया मेरे पीछे,
उसको शायद जल्दी थी या
बहुत से लोगों की तरह रोब झाड़ना चाहता था,

तन्दूर वाले से उसने दो तीन बार जल्दी रोटी लगाने को कहा,

तन्दूर वाले ने उसकी बात सुनी अनसुनी कर दी।

वह व्यक्ति जो रोब झाड़ रहा था फिर उसने और गुस्से से रोटी लगाने को कहा

जिसके जवाब में रोटी लगाने वाले ने

वह एतिहासिक बात कही कि मुझ समेत किसी की भी हिम्मत ना हुई कि

उसे जल्दी रोटी लगाने को बोले।

*तन्दूर वाले ने कहा:- "सब्र कर ले मामा!.... अगर तू इतना ही बदमाश होता तो घर में रोटियाँ ना पकवा लेता।"* 😜😜