ये सर्वमान्य मान्यता है कि शराब स्वास्थ्य, आर्थिक रूप व मानसिक रूप से खराब है पर सबसे ज्यादा इसका शिकार आर्थिक और मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति ही होता है सोकिया पीने वाले ओट/पर्दा कि आड़ लेते है और इसके निर्धारित मूल्य से ज्यादा अपनी पहचान छुपाने के लिये चुकाते है और शराब माफिया उसे परपरा मानते हुए गरीब अहसाये व्यक्ति जो शराब का आदि है उसको लूटने का काम करता है शराब के सौकीन , पार्टीवाजी लोगों को अधिक मूल्य का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है पर एक ग़रीब परिवार कि गरीबी बढ़ने का एक कारण शराब का अधिक मूल्य व इसका अधिक प्रचलन है इस अधिक मूल्य कि रोक के साथ साथ शराब पीने वाली आदतों को रोकने वाले उपाय व योग्य कार्यप्रणाली वर्तमान सरकारों को विकसित करनी चाहिये

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