नाक तक लम्बा तिलक लगाकर भजन के नाम पर फूहड़ता फैलाने वाले धर्मदूषकों(गायकों/नर्तकी) से सावधान रहिए। धर्म का आवरण धारण करने के बाद ही अधर्म करना आसान हो जाता है क्यों कि लोगों की आस्था और विश्वास आज भी धर्म पर है आदि एव अनंत काल से धर्म पर थी यदि ऐसा नहीं है तो राजा रावण महा प्रतापी महाबली होते हुए भी भवानी सीता का अपहरण नहीं कर पाया उसे भी सीता माता का अपहरण करने के लिए धर्म का आवरण धारण करना पड़ा अर्थात साधु का रूप बनाना पड़ा। और ऐसे लोगों को सुनने वाली जनता इनसे भी बड़ी दोषी हैं जो इन फूहडो को सुन रही हैं मुँह पर जूता फेक कर भगाना चाहिए इनको ।
जय श्रीराम 🚩