किसान पुत्र Cover Image

#प्राच्य_ग्राम्य_दर्शन

हल खींचते समय यदि कोई बैल गोबर या मूत्र करने की स्थिति में होता था तो किसान कुछ देर के लिए हल चलाना बन्द करके बैल के मल-मूत्र त्यागने तक खड़ा रहता था ताकि बैल आराम से यह नित्यकर्म कर सके, यह आम चलन था ।
हमने (ईश्वर वैदिक) यह सारी बातें बचपन में स्वयं अपनी आंखों से देख हुई हैं ।
जीवों के प्रति यह गहरी संवेदना उन महान पुरखों में जन्मजात होती थी जिन्हें आजकल हम अशिक्षित कहते हैं । यह सब अभी 25-30 वर्ष पूर्व तक होता रहा ।

उस जमाने का देसी घी यदि आजकल के हिसाब से मूल्य लगाएं तो इतना शुद्ध होता था कि 2 हजार रुपये किलो तक बिक सकता है । उस देसी घी को किसान विशेष कार्य के दिनों में हर दो दिन बाद आधा-आधा किलो घी अपने बैलों को पिलाता था ।

टटीरी नामक पक्षी अपने अंडे खुले खेत की मिट्टी पर देती है और उनको सेती है ।
हल चलाते समय यदि सामने कहीं कोई टटीरी चिल्लाती मिलती थी तो किसान इशारा समझ जाता था और उस अंडे वाली जगह को बिना हल जोते खाली छोड़ देता था।उस जमाने में आधुनिक शिक्षा नहीं थी ।
सब आस्तिक थे ।
दोपहर को किसान जब आराम करने का समय होता तो सबसे पहले बैलों को पानी पिलाकर चारा डालता और फिर खुद भोजन करता था ।
यह एक सामान्य नियम था ।

बैल जब बूढ़ा हो जाता था तो उसे कसाइयों को बेचना शर्मनाक सामाजिक अपराध की श्रेणी में आता था ।
बूढा बैल कई सालों तक खाली बैठा चारा खाता रहता था, मरने तक उसकी सेवा होती थी ।
उस जमाने के तथाकथित अशिक्षित किसान का मानवीय तर्क था कि इतने सालों तक इसकी माँ का दूध पिया और इसकी कमाई खाई है।
अब बुढापे में इसे कैसे छोड़ दें , कैसे कसाइयों को दे दें काट खाने के लिए ?
जब बैल मर जाता तो किसान फफक-फफक कर रोता था और उन भरी दुपहरियों को याद करता था जब उसका यह वफादार मित्र हर कष्ट में उसके साथ होता था । माता-पिता को रोता देख किसान के बच्चे भी अपने बुड्ढे बैल की मौत पर रोने लगते थे ।
पूरा जीवन काल तक बैल अपने स्वामी किसान की मूक भाषा को समझता था कि वह क्या कहना चाह रहा है ।

वह पुराना भारत इतना शिक्षित और धनाढ्य था कि अपने जीवन व्यवहार में ही जीवन रस खोज लेता था । वह करोड़ों वर्ष पुरानी संस्कृति वाला वैभवशाली भारत था , वह अतुल्य भारत था ।
पिछले 30-40 वर्ष में लार्ड मैकाले की शिक्षा उस गौरवशाली सुसम्पन्न भारत को निगल गई ।
हाय रे लार्ड मैकाले !
तेरा सत्यानाश हो । तेरी शिक्षा सबसे पहले किसी देश की संवेदनाओं को जहर का टीका लगाती है , फिर शर्म-हया की जड़ों में तेजाब डालती है और फिर मानवता को पूरी तरह अपंग बनाकर उसे अपनी जरूरत की मशीन का रूप दे देती है।
🙏

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आज किसानों के साथ हुई बर्बरता निंदनीय है जो अन्नदाता इस देश का पेट भरता है उसे भी अपना हक मांगने का अधिकार होना चाहिए!
हर किसी सरकार में किसानों के साथ ऐसे ही हत्याचार होता है!
क्या? किसान लाठियाँ खाने के लिए पैदा होता है यह देश का अन्नदाता है इसका सम्मान करना चाहिए!

यह सरकार आपस में ही हमें भिड़वाने का काम करती है लठ खाने वाला भी किसान है और पुलिस वाले भी किसानों के बेटे हैं! यह सरकार का तानासाही रवैया है इसे देश का किसान बर्दास्त नहीं करेगा जब जब किसान उठा है सरकारें बदली हैं!

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किसान भाईयों सावधान आपका विश्वशनीय किट नाशक FMC कॉरेजन बहुत भारी मात्रा में नकली बिक्री हो रहा है। इसी पर कार्यवाही करते हुए खातेगांव जिला देवास में सबनम कृषि सेवा केन्द्र पर बड़ी मात्रा में नकली कॉरेजन पकड़ाई गई है।
इसीलिए सभी किसान भाईयो से निवेंदन है कि coragen केवल अधिकृत विक्रेता से ही खरीदे।

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फार्मा ट्रैक्टर

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ये कौन सा पेड़ है भई, काफी बड़े बड़े फल हैं इसमे😍🙈

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