एक विचार Cover Image

🏵═• सबसे बड़ा सुख •═🏵
एक आदमी ने दुकानदार से पूछा ~
केले और सेब क्या भाव हैं ?
केले 20 रु.दर्जन और
सेब 100 रु. किलो.

उसी समय एक गरीब सी औरत
दुकान पर आयी और बोली ~
मुझे एक किलो सेब और
एक दर्जन केले चाहिये.
क्या भाव है भैया ?

दुकानदार ~ केले 5 रु दर्जन और
सेब 25 रु किलो.

औरत ने कहा ~ जल्दी से दे दीजिये.
दुकान में पहले से मौजूद ग्राहक ने
खा जाने वाली निगाहों से घूरकर
दुकानदार को देखा.

इससे पहले कि वो कुछ कहता ...
दुकानदार ने ग्राहक को
इशारा करते हुये,
थोड़ा सा इंतजार करने को कहा.

औरत खुशी-खुशी खरीदारी करके
दुकान से निकलते हुये बड़बड़ाई ~
हे भगवान !
तेरा लाख-लाख शुक्र है.
मेरे बच्चे, फलों को खाकर
बहुत खुश होंगे.

औरत के जाने के बाद दुकानदार ने
पहले से मौजूद ग्राहक की तरफ
देखते हुये कहा ~
ईश्वर गवाह है, भाई साहब !
मैंने आपको कोई धोखा नहीं दिया.

यह विधवा महिला है, जो
चार अनाथ बच्चों की माँ है.
यह किसी से भी, किसी तरह की
मदद लेने को तैयार नहीं है.
मैंने कई बार कोशिश की,
और हर बार नाकामी मिली है.
तब मुझे यही तरीकीब सूझी है, कि
जब कभी ये आए, तो मैं उसे
कम से कम दाम लगाकर चीज़े दे दूँ.

मैं यह चाहता हूँ , कि
उसका भरम बना रहे,
और उसे लगे, कि
वह किसी की मोहताज नहीं है.
मैं इस तरह भगवान के बन्दों की
पूजा कर लेता हूँ.

थोड़ा रूक कर दुकानदार बोला ~
यह औरत हफ्ते में एक बार आती है.
भगवान गवाह है ....
जिस दिन यह आ जाती है, उस दिन
मेरी बिक्री बढ़ जाती है, और उस दिन
परमात्मा मुझ पर मेहरबान हो जाता है.
ग्राहक की आँखों में आँसू आ गए,
उसने आगे बढ़कर दुकानदार को
गले लगा लिया, और
बिना किसी शिकायत के
अपना सौदा खरीदकर
खुशी-खुशी चला गया.

♾️♾️♾️♾️

📍 कहानी का मर्म 📍

खुशी अगर बाँटना चाहो, तो
तरीका भी मिल जाता है.
देने का सुख,
अन्य सभी सुखों से बड़ा है.
यहाँ देने का मतलब
पैसा, दान या मदद से नहीं है.
जिसके पास जो है, भले ही वो दे
उसमें कुछ गलत नहीं है, लेकिन
पैसों से भी बड़ी एक दौलत है ~
प्रेम, सहयोग, विश्वास,
अपनापन, सम्मान
👆 ये ऐसा धन है, जिसकी तुलना
पैसों से नहीं की जा सकती.
इसे आप जितना लोगों में बाँटते हो,
इसका सुख असीम है, क्योंकि
प्रेम और सुख वो धन है, जो
न माँगकर प्राप्त होता है,
ना छीनकर, और ना ही वस्तुओं या
कामनाओं को प्राप्त करके.
यह तो बस ...
बाँटने से ही प्राप्त होता है.

🙏🥀 🌻 🥀🙏

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✧​ ये ज्ञान है या अज्ञान ✧​
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एक सवाल रह-रह कर
दिमाग में कौंध रहा है ....
ये कौन लोग हैं ~ ❓

आशाराम बापू के लिए ...
बेसुध होकर रोने वाले ~

राम रहीम के लिए ...
कुछ भी फूँकने वाले ~

राधे माँ का फाइव स्टार
आशीर्वाद लेने वाले ~

रामपाल के लिए ...
अपनी जान तक दे देने वाले ~

निर्मल बाबा की हरी चटनी खाकर
अरबपति बन जाने वाले ~

कुछ जवाब भी सामने आ रहे हैं ~

दरअसल इस भीड़ के मूल में ~
दुःख है, अभाव है, गरीबी है, और
शारीरिक मानसिक शोषण है.

अहंकार के साथ ...
कुछ हो जाने की तमन्ना है.

एक ऐसा विश्वास है, जिस पर ....
आडंबरों की फसल लहलहाती है.

आप जरा ध्यान से देखेंगे, तो
पाएंगे कि ऐसे भक्तों में ...
ज्यादा संख्या
महिलाओं, गरीबों, दलितों और
शोषितों की है.

इनमें से कोई
अपने बेटे से परेशान है, तो
कोई अपनी बहू से. किसी का
जमीन का झगड़ा चल रहा है, तो
किसी को कोर्ट-कचहरी के चक्कर में
अपनी सारी जायदाद बेचनी पड़ी है.
किसी को सन्तान चाहिए,
किसी को नौकरी.
यानी ...
हर आदमी एक तलाश में है.
और ये तलाश ~
धार्मिक तलाश नहीं है.
ये भौतिक लोभ की
आकांक्षा में उपजी ...
प्रतिक्रिया है.
जिसे स्वयं की तलाश होती है,
उसे भीड़ की जरूरत नहीं,
उसे तो ...
एकांत की जरूरत होती है.

वो किसी 'रामपाल' के पास नहीं,
'रामकृष्ण परमहंस' के पास जाता है.
वो किसी 'राम-रहीम' के पास नहीं,
'रामानन्द' के पास जाता है.

उसे पैसा, पद और अहंकार के साथ
भौतिक अभीप्साओं की जरूरत नहीं.
उसे ज्ञान की जरुरत होती है.

गीता में भगवान कहते हैं ~
ज्ञान के समान पवित्र
और कुछ नहीं है.
ना ही गंगा न ही ये साधु-संत और
न ही इनके मेले और झमेले.

लेकिन ... बड़ी बात ये है कि ...
आज ज्ञान की जरूरत किसे हैं ?
चेतना के विकास के लिए ...
कौन योग दर्शन पढ़ना चाहता है ?

यहाँ जो चेतना को परिष्कृत करने,
ध्यान करने और साधना करने की
बातें करता है, उसके यहाँ
भीड़ कम होती है, और
जो नौकरी देने, सन्तान सुख देने,
और ... अमीर बनाने के
सपने दिखाता है,
👉 उसके यहाँ लोग टूट पड़ते हैं.

क्या ताज्जुब है कि ~ जो साईं बाबा
पूरा जीवन फकीरी में बिता दिए,
उनकी मूर्तियों में ...
👉 सोने और हीरे जड़े हैं.

जिस बुद्ध ने धार्मिक आडम्बरों को
बड़ा झटका दिया, संसार में ...
उन्हीं की सबसे ज्यादा मूर्तियाँ हैं.

दरअसल ये सब अन्धविश्वास
एक दिन में पैदा नहीं होता.
ये पूरा एक चक्र है.

जरा ध्यान से टी.वी. देखिये,
रेडियो सुनिये,
हम क्या देख रहे हैं ?
क्या सुन रहे हैं ?
👉 अन्धविश्वास ही तो देख रहे हैं..

वही तो सुन रहे हैं… यानी
👉 ठंडा मन कोकाकोला होता है.

फलां बनियान पहन लो ...
लड़कियाँ .. तुम्हारे लिए
👉 सब कुछ कर देंगी.

ये इत्र लगाओ तो ...
👉 लड़कियाँ .. तुम पर मर मिटेंगी.

इस कम्पनी की चड्ढी पहन लो तो
👉 गुंडे अपने आप भाग जाएंगे.

~ ये पान मसाला खाओ ~
स्वास्थ्य इतना ठीक रहेगा, कि ...
👌 दिमाग खुल जाएगा.

इन सब बेवकूफियों पर ...
रोक लगनी चाहिए, तभी हम
चाहे कोई आर्थिक बाजार हो या
धार्मिक बाजार इससे बच सकते हैं.

ये जो धार्मिक गुरु होते हैं ...
ये काउंसलर होते हैं.
ये धार्मिक एडवर्टाइजमेंट करते हैं.
वहाँ आदमी का विवेक
शून्य हो जाता है, और आप
वही करने लगतें हैं, जो आपके
अवचेतन में भर दिया जाता है.

👇 ~ आज जरुरत है ~ 👇
~ जागरूकता की ~ विवेक की ~
जरा तार्किक बनने की, और
उससे भी ज्यादा ज्ञान के तलाश की,
वर्ना ... हम यूँ ही भटकते रहेंगे.

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◆◆मुझे रविवार चाहिए ◆◆

मुझे भी एक रविवार चाहिए
साल में बस एक दो बार चाहिए
खो रही हूँ अपने ही भीतर कहीं मैं
ख़ुद के साथ घण्टे दो चार चाहिए
मुझे भी एक रविवार चाहिए

सरपट दौड़ती रोज़ की सुबह नहीं
एक दिन मीठी सी भोर चाहिए
रसोई की चिंता यूँ तो कभी जाती नहीं
पर एक दिन मुझे भी अवकाश चाहिए
मुझे भी एक रविवार चाहिए

न कपड़े न बर्तन न झाड़ू न कटका
न बच्चों का होमवर्क न पानी का मटका
एक दिन इनकी न हो कोई फ़िक्र मुझे
एक प्याली गर्म चाय बिस्तर पर चाहिए
मुझे भी एक रविवार चाहिए

सब बैठें हों जब साथ मैं किचन में न रहूँ
वो बातें वो ठहाके जो छूट गए थे कभी
वो सब एक दिन के लिए लौटा दो मुझे
आधी हँसी नहीं बेफ़िक्र मुस्कान चाहिए
मुझे भी एक रविवार चाहिए

घर के हर कोने में बसती है जान मेरी
मुझे प्यारी बहुत है ये दुनिया मेरी
शिकायत नहीं है ये है ख़्वाहिश मेरी
एक दिन मुझे भी थोड़ा आराम चाहिए
मुझे भी एक रविवार चाहिए
★★★

प्राची मिश्रा

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सिर्फ चाय ही तो बेचनी थी...
किसी काम को बोझ मानकर करने में और अपने काम से प्यार करने में बस इतना ही फर्क है जो इस तस्वीर में दिख रहा है।
जिसे यह समझ आ गया उसके लिए काम काम नहीं रहता मज़ा बन जाता है।
और जिसे यह समझ नहीं आया उसके लिए दुनिया का कोई भी काम सिर्फ और सिर्फ सज़ा बन जाता है।
अब यह आपके ऊपर है कि आप मज़ा चाहते हैं या सज़ा चाहते हैं।

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जीवन के पहलुओं को दर्शाते सुंदर विचार