रोचक तथ्य Cover Image

वह आठ लाख साल से यहाँ खड़ा है। सबसे पहले इस रेगिस्तानी शेर को ९५०० ईसा पूर्व में देखा गया था। यानि ये उस समय उदय हुई सभ्यता से भी पुराना था। उसके बाद जाने कितने वर्ष वह रेत में दबा रहा। स्फिंक्स के बारे में एक कथा है। वह यहाँ से निकलने वालों से एक पहेली पूछता था। यदि उत्तर सही मिलता तो उसे शहर में जाने को मिलता, नहीं तो स्फिंक्स उन्हें खा जाता था। पहेली थी 'वह क्या है जो सुबह चार पैरों पर चलता है, दोपहर में दो पैरों से और शाम को तीन पैरों से चलता है। कहते हैं Oedipus ने इसका सही उत्तर दिया था। उसका उत्तर था 'मनुष्य'। वह जन्म लेते ही चार पैरों से चलता है, युवा होते ही दो पैरों से और जीवन की साँझ में लाठी लेकर, यानि तीन पैरों से। स्फिंक्स मौन खड़ा रहा और उसके आसपास दंतकथाओं का जन्म होता चला गया। ९५०० ईसा पूर्व वह कई किलोमीटर दूर से चमकता प्रतीत होता था। उस दौर की सभ्यता ने स्फिंक्स के मुंह को परिवर्तित कर दिया। पहले वह शेर का मुंह हुआ करता था। यदि खगोलीय पक्ष से देखे तो स्फिंक्स मृग नक्षत्र (Orion) की ओर देखता है। मृग नक्षत्र रहस्यमयी रूप से हमसे जुड़ा हुआ है। वहीं कहीं pillars of creation हैं, जहाँ सितारों की धूल जमा होती है। बड़े ही शांत भाव से वह मृग नक्षत्र को निहारता रहता है। उसकी ये तपस्या भंग हुई, जब ये हरा-भरा क्षेत्र पहले अति वृष्टि से जलमग्न हुआ और उसके बाद जलवायु परिवर्तन ने इसे मरुस्थल में छुपा दिया। अब वह पुनः साधना में लीन है। वह स्वयं एक महान सनातनी रहस्य है जो उन रचना के स्तम्भों (pillars of creation) को देखता है, जहाँ नटराज नृत्यरत है।

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ये सिक्के भारत से प्राप्त नहीं हुए थे। ये हरक्यूलिस की धरती से मिले थे। वही हरक्यूलिस, जिसके चरित्र की विशेषताएं श्रीकृष्ण की विशेषताओं से मेल खाती है। गौधन का सम्मान तो सनातन ही कर सकता है। एक सिक्के में बैल दिखाया गया है। बैल का श्रृंगार देख मुझे दीपावली के बाद के दिनों की स्मृति हो आई, जब गौधन को सजा-संवार कर गाँव में घुमाया जाता है। दूसरे सिक्के में गौमाता के दर्शन होते हैं। इस सिक्के में तो स्वस्तिक भी दिख रहा है। जब आर्कटिक प्रदेश की भूमि से देव तुल्य अज्ञात रहस्यमयी व्यक्तियों ने वेदों का ज्ञान मौखिक रूप से सुनाया, तो उस ज्ञान को लेकर सनातनी संपूर्ण विश्व में फ़ैल गए थे। पृथ्वी का मूल धर्म सनातन ही था। वह प्रकृति से जुड़ा हुआ था, उसमे कृत्रिमता नहीं थी। पृथ्वी के नियमों के अनुरूप इस धर्म को विकसित किया गया था। ये अलिखित नियम था कि इस धरा के सभी प्राणियों का एक ही धर्म होगा। आज सनातन की बहुत सी फोटोकॉपी आप देख पा रहे हैं लेकिन वे प्राण विहीन है। आर्कटिक प्रदेश में फूटा सनातन का पहला सोता नितांत दैवीय था। ये पहली और आखिरी घटना थी, जब सनातन धर्म के पालक इस तरह प्रत्यक्ष रूप से सामने आए थे। ये बात लोकमान्य तिलक अपने शोध के बाद लिख गए थे। सिक्के पहली शताब्दी के हैं इसलिए उनका आकार पूर्ण गोल नहीं है। मशीनरी के अभाव में हाथों से ढाले गए चांदी के सिक्के।

विपुल जी ।

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कोई अपराधी जितना तेज दिमाग होता है,समाज, पुलिस, न्याय-व्यवस्था के लिए उतना ही घातक है।चाल्स शोभराज ने एशिया की सबसे बड़ी और हाइटेक जेल,तिहाड़ को ब्रेक करने के लिए दस साल से प्लान बनाता रहा।अपने जन्मदिन पर हर साल जेल में मिठाइयां बांटता रहा और 6 अप्रेल1986 को सबको बेहोश कर, तिहाड़ से भाग निकला। हालांकि महाराष्ट्र में पकड़ा गया एक दोगला,हाइब्रिड आदमी है।इसका जन्म 1944 में हुआ था।आज इसकी उम्र करीब 76 साल है।इस पर अब भी कोई विश्वास नहीं करता।पता नहीं क्या कर गुजरे।मौत की सजा से बचने के लिए दुशरे देश की जेल में चला गया।
कहते हैं कि जहां से चाल्स शोभराज सोचना शुरू करता है, वहां आम लोगों के सोचने की हद खत्म हो जाती है।
पूरे एशिया का कुख्यात अपराधी रहा है जो टुरिस्ट के रुप में घुम-घुमकर हत्याएं करता रहा।1972 से 1976 तक इसने बीस कत्ल किये।ज्यादा भी हो सकते हैं। आमतौर पर महिलाओं को शिकार बनाता था।इसे 'बिकनी किलर' भी कहा जाता है।भारत में दो-तीन बार फरार हो जाने के बाद,सुरक्षा के लिहाज से इसे तिहाड़ भेजा गया था। बहुत से दुसरे देशों की जेलों में रहा।अधिकतर उम्र जेलों में गुजरी है, नहीं तो पता नहीं क्या-क्या गुल खिलाता!

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देखिए, क्यों रत्न टाटा, मुकेश अम्बानी जितने धनवान क्यों नहीं हैं।

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