पोलिटिकल चौपाल Cover Image

भारत की टेक्स्टायल इंडस्ट्री दुनिया में एक ताक़त थी।

फिर 1980s में मुंबई में दत्ता सामंत के नेतृत्व में साल भर से अधिक हड़ताल चली व वहाँ की सारी मिलें बंद हो गयी।

लेकिन कलकत्ता में अभी भी मिलें शेष थी। फिर 1990s में कलकत्ता में CITU के नेतृत्व में 144 दिन हड़ताल चली व वहाँ की भी सारी मिलें बंद हो गयी।

इसके बाद चीन और बांग्लादेश पश्चिमी देशों के टेलर मास्टर बन गये।

समाजवादी विचाधारा वाले नेता ठग होते है।

लेकिन हम स्वयं क्या है? दुनिया के सबसे बड़े दुतिये जो उद्योग लगाने वालो को अपना दुश्मन मानते है, व उन्हें बंद कराने वालों को अपना हितेशी।

मैंने गाँव में देखा था कि गाय-भेंसो के मन में भी उन्हें चारा देने वालों के प्रति अलग ही लगाव हो जाता है। हम वो अनोखे जीव है जो थाली परसने वाले को गाली देते है व थाली पर लात मारने वालों के चरणो में लेटते है।जिन्होंने हमारे बच्चों के रोज़गार समाप्त कर अपने बच्चों को अरबपति बना लिया उन्हें हम वोट देते है।

और इस सब से भी कुछ सीखा नहीं। अभी भी ठग “किसान” नेताओ के लिए जान देने को तड़प रहे है, क्यूँ, ये भी पता नहीं?

पूछो कि कृषि क़ानून में ग़लत क्या है तो चुप ?

मेरी भविष्यवाणी

गुजरात की अगले विधानसभा चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी और बीटीपी की गठजोड़ को 4 से 5 सीटें मिलेंगी आम आदमी पार्टी को शायद सूरत में एक सीट मिल सकती है और कांग्रेस 50 के नीचे सिमट जाएगी

बीजेपी 120 से 130 रहेगी

अभी मैं गुजरात के नगर निगम के रिजल्ट को देख रहा था। अहमदाबाद में 8 सीटें ऐसी हैं जो कांग्रेस ने 100 से भी कम मार्जिन पर ओवैसी से जीती है

अभी गुजरात में नगर पालिका और जिला पंचायत तथा तालुका पंचायत के चुनाव होने बाकी हैं इन चुनाव में भी गुजरात के वह एरिया जो ग्रामीण हैं लेकिन जहां मुस्लिम बहुमत में है जैसे कि भरूच जिला वागरा तालुका केशोद और अमरेली के बीच का पट्टा जूनागढ़ के कुछ एरिया गोधरा जिले के कुछ एरिया वहां भी मुस्लिम ओवेसी को ही वोट देंगे

ओवैसी पिछले कुछ दिनों से गुजरात में ही रुका है और गांव गांव प्रचार कर रहा है कल उसने गोधरा में मुसलमानों से कहा कि अब वक्त आ चुका है कि अब हमारी अपनी खुद की पार्टी होनी चाहिए उस सिर्फ हम मुसलमानों की बात करें हमारे समस्याओं को उठाएं और हमारे साथ हर वक्त खड़ी रहे

मैंने जिन्ना का दौर तो नहीं देखा लेकिन मैंने किताबों में पढ़ा है ठीक इसी तरह की स्ट्रेटिजी जिन्ना ने भी बनाई थी जिस तरह की स्ट्रेटजी ओवैसी बना रहा है

जिन्ना भी पूर्वी बंगाल यानी आज का बांग्लादेश तथा अविभाजित भारत के लाहौर पेशावर क्वेटा से लेकर हैदराबाद जूनागढ़ तमाम जगहों पर घूम घूम कर मुस्लिम लोगो मुस्लिम सामाजिक कार्यकर्ताओं इत्यादि को संबोधित करते हुए कह रहा था यह मुसलमानों का अपना नुमाइंदा होना चाहिए हम मुसलमानों की अपनी पार्टी होनी चाहिए

और फिर एक दिन उसने डायरेक्ट एक्शन डे घोषित कर दिया डायरेक्ट एक्शन डे क्या है आप गूगल पर सर्च करिए

जिन्ना ने मुसलमानों को आदेश दिया सारे मुस्लिम हथियार लेकर यानी उनके पास जो भी हथियार है चाहे तलवार हो भला हो लाठी हो बंदूकों कट्टा हो रिवाल्वर हो अपने अपने एरिया में दूसरे धर्म के लोगों का नरसंहार मचाना शुरू कर दें और वह डायरेक्ट एक्शन डे इतना खतरनाक था गांधी और नेहरू डर गए और उन्होंने जिन्ना को एक अलग देश दे दिया यानी भारत के टुकड़े टुकड़े कर दिया

मेरा सबसे बड़ा डर यह है कि आज ओवैसी भारत के संविधान की बात करता है दलितों की बात करता है लेकिन उसके हर सभा में नारे तकबीर अल्लाह हू अकबर लगते हैं

नारे तकदीर एक जंग का नारा है यानी एक युद्ध घोष है ..नारे तकबीर अल्लाह हू अकबर का नारा हर एक इस्लामिक सेनाएं तब लगाती थी जब वह किसी दूसरे राज्य पर हमला करती थी यानी चारों तरफ से आवाज दो कि इस कायनात में सिर्फ अल्लाह ही एकमात्र सर्वश्रेष्ठ है

अब इंतजार करिए जैसे 1940 तक भारत के हिंदुओं को कुछ भी आभास नहीं था की 1947 में क्या होने वाला है और फिर अचानक सब कुछ बदल गया सब कुछ लुट गया

आप मेरी बात लिख कर रखिए एक वक्त ऐसा आएगा जब ओवैसी के पार्टी के लोग ठीक जिन्ना की तरह मुस्लिमों से डायरेक्ट एक्शन डे का ऐलान करेंगे और फिर 1947 फिर से दोहराया जाएगा
- Jitendra pratap singh

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