बचपन की यादें Cover Image

तास के लिए पूरे शहर में माचिस के खाली बॉक्स ढूँढ़ते रहते थे क्या गजब के दिन थे....!😊😊😊

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याद आती है वो देसी लाइब्रेरी जो गर्मी आते ही हर चौक पर खुल जाती थी..50 पैसे किराया.. इस बात का डर की 24 घंटे से ज़्यादा हो गए तो 1 रुपये लग जाएंगे..
दोस्तों का शानापन... 4 दोस्त मिलकर 4 अलग अलग कॉमिक्स लाएंगे और पढ़ने के बाद एक्सचेंज कर लेंगे।
लाइब्रेरी वाले का शानापन... नई हिट कॉमिक्स आएगी तो सिर्फ 4 घंटे के लिए किराये पर देगा..वो तपती धूप में कॉमिक्स के लिए सूरज से लड़ना.....गर्मियों की छुट्टियों में तरह तरह की कॉमिक्स पढ़ते थे और हर कॉमिक्स में कोई न कोई सकारत्मक सोच होती थी...

हमारे एक्शन सुपर हीरोज में सुपर कमांडो ध्रुव, नागराज, तौसी, साबू, डोगा के साथ साथ कुछ कॉमेडी किरदार भी थे जिनमें रमन, पिंकी, चाचा चौधरी, बांकेलाल के साथ और भी ढेर सारे रहे हैं.

पढ़ते पढ़ते हम उन्हीं की दुनिया में खो जाया करते थे जैसे वो भी हमें देख समझ रहे हैं... कई बार जब कोई पुरानी कॉमिक्स फट जाती थी तो उसके किरदार जैसे नागराज, ध्रुव, डोगा, तौसी या फिर अपना बिल्लू उनकी फोटो कैंची से काटकर अपनी अलमारी या दीवार पे चिपका दिया करते थे.

हर साल अखबार से लेके पुराने कोर्स की किताब कॉपियां हम रद्दी में बेच दिया करते थे लकिन हमारी इकट्ठी की हुई कॉमिक्सें कभी रद्दी का हिस्सा नहीं बनीं फिर बेशक कितनी भी कट-फट गईं हों..

बहुत कुछ है ऐसा जेहन में है जो जिया है... फिर से बताऊंगा जो हमसे और आप सबसे मिलता जुलता है काफी हद तक! काफी कुछ है हम सभी के दिल में कुछ पुराना सा जिसे बस अपने शब्दों में लिख डालने की देर है. बाकी हम तो हैं ही बार बार कुछ पुराना सा याद दिलाने के लिए... टटोलते हैं वो ही कुछ पुरानी सी रद्दियां जो मन में दबी पड़ी हैं! 😀
आपकी favorite मैगज़ीन या पत्रिका कोन सी थी ?

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यह गोलियां किस किस ने खाई है ₹1 में कितनी आती थी

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बचपन की भूली बिसरी यादें।